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विश्व को संदेश (Hindi)
अच्छा समाचार
मेरे विचार से हम सभी यह जानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह बात है कि इस दुनिया, ब्रह्मांड, हमारा तथा सभी जीव-जंतुओं का सागमन अचानक ही नहीं हुआ। सभी अस्तित्वात चीज़ों के पीछे एक आदेश, योजना, उद्देश्य और सृजनकर्ता था। अपनी घड़ी पर नज़र डालें, यह अचानक नहीं हुआ। यह मस्तिष्क, सृजनशीलता और शक्ति का प्रतिबिम्ब है। धारणा पर विचार करने के लिए बुद्धि, इसकी रचना के लिए सृजनशीलता और इसे बनाने के लिए शक्ति। जिस शरीर पर आप अपनी घड़ी डालते हैं, यह ईश्वर को कितना अधिक दर्शाती है।
हां, साक्ष्य स्पष्ट है, ईश्वर ने रचना की! जैसे-जैसे मैंने इस धरती पर, प्रत्येक महाद्वीप में और लगभग प्रत्येक राष्ट्र में भ्रमण किया, मैंने पाया कि अधिकांश लोग ईश्वर में विश्वास करते हैं-लेकिन हम ईश्वर को कैसे जानते हैं? हम ईश्वर को कैसे ढ़ूंढ़ते हैं? क्या सृजनकर्ता अपनी रचनाओं से बात करना चाहता है? निश्चित रूप से, जिस तरह माता या पिता प्रेम सिखाना चाहते हैं और ख़तरों की चेतावनी भी देते हैं, ईश्वर अपने बनाए हुए लोगों से उतना ही अधिक बात करना, प्रेम करना और उनका मार्गदर्शन करना चाहता है। लेकिन हम जानते हैं कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ हुई है!
युद्ध, घृणा, भूख, लालच, स्वार्थ, प्रतिशोध तथा कई अन्य भयानक चीजों के परिपूर्ण इस दुनिया में, हम जानते हैं कि कहीं न कहीं गड़बड़ है! दूसरों के साथ-स्वयं के साथ। क्यों? पवित्र बाइबिल (वह पुस्तक जो लोगों को ईश्वर की सच्चाई बताती है) के अनुसार यद्यपि ईश्वर ने एक परिपूर्ण दुनिया बनायी थी, पहले दो लोग ऐडम और ईव, शैतानी (एक निकृष्ट परिश्ता जिसने ईश्वर का विरोध किया था) के लालच के सामने झुक गए और उन्होंने ईश्वर के विरुद्ध आचरण किया। हम सभी ने उनके पालन मार्गों का अनुसरण किया है जो ईश्वर से अलग है तथा जिससे प्राणी ईश्वर से हमेशा के लिए अलग हो जाता है और बाइबल के अनुसार नरक नामक जगह पर पहुंच जाता है।
विश्वभर में सभी धार्मिक लोग ईश्वर के संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं तथा शांति, सिद्धि, प्रयोजन, और शाश्वत जीवन चाहते हैं। हम ईश्वर तक कैसे पहुंचते हैं? हम नहीं पहुंच सकते हैं!!! ध्यान से सुनें-सभी धर्म निम्न दो में से एक हैं।
A.) हम अपने प्रयासों से ईश्वर तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
B.) ईश्वर हमारे लिए वह करता है जो हम अपने लिए नहीं कर सकते हैं।
योजना (A) के अंतर्गत, हमारी घोर समस्या है-पाया, "सभी ने पाप किया है, और ईश्वर की महिमा को कम आंका है", "मनुष्य का हृदय अत्यधिक पापमय है," "पाप का परिणाम मृत्यु है।" हम सभी पाप के दोषी हैं और इसलिए ईश्वर से दूर हैं। निराश-यहां तक कि हमारी अच्छाई बहुत गंदी है और ईश्वर पवित्र है।
योजना (B) ईश्वर में ढूंढता है, "ईश्वर ने हमें पहले प्यार किया।" हमारे पापों की दीवार हमें ईश्वर से अलग करती है। लेकिन ईश्वर ने दुनिया को इतना प्यार दिया कि उसने अपना एकमात्र पुत्र दे दिया, उसने स्वयं को दे दिया, जीसस, जो शुरू से पिता के साथ था, जो ईश्वर प्रदत्त था, मांस का बना और उसे पवित्र आत्मा द्वारा वर्जिन मैरी के गर्भ में रखा गया। उसका जन्म लगभग 2000 वर्ष पहले वैथलेहम में हुआ, उसने पापरहित जीवन बिताया, कई महान चमत्कार किए, पिता के ईश्वरीय ज्ञान का प्रचार किया और शिक्षा दी। उसके बाद महिमामय, सत्य और शक्तिशाली हैं (पवित्र बाइबिल में इंजील की पहली चार पुस्तकें पढ़ें)। ईसा मसीह मनुष्य की दहशत के सामने हार मान गए और उन्हें प्रताड़ित किया गया, पीटा गया तथा पेरूशलम से थोड़ा बाहर कैलवरी नामक स्थान पर एक बड़ी सूली से ले जाया गया वहां उन्हें सूली पर चढ़ाया गया (सूली पर कील से ठोका गया)। जिससे उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन तीन दिन बाद उनका पुनर्जन्म हुआ (वह उसी शरीर में जीवित हुए)। वह कुछ हफ्ते पृथ्वी पर रहे और फिर स्वर्ग में चले गए। वह एक दिन उसी तरह पृथ्वी पर आएंगे। वह स्वर्ग में उन्हें लेने गए थे जो उनमें विश्वास करते हैं और उनक अनुसरण करते हैं, स्वर्ग में सदा उनके साथ रहने के लिए।
जीसस ने कहा कि वह खोए हुए लोगों को ढ़ूंढ़ने और बचाने के लिए आए। उन्होंने आपके पापों और मेरे पापों के लिए पीड़ा सही और फिर उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने वह ऋण चुकाया जो हम नहीं चुका सके। जीसस ने कहा, "मैं मार्ग हूं, सच्चाई हूं, जीवन हूं, कोई भी मनुष्य ईश्वर के पास नहीं आता है लेकिन मेरे द्वारा आता है।" "यदि आपने मुझे देखा है तो आपने ईश्वर को देख लिया है" ईश्वर को कोई नहीं जान सकता है, जब तक उसका पुत्र इल्हाम के रूप में उसे व्यक्त न करे।" ईश्वर ने जीसस को हमारे लिए मरने हेतु भेजकर वह कार्य किया जो हम अपने लिए नहीं कर सके। ईश्वर, जीसस के इस पवित्र बलिदान को उन लोगों के पापों को दूर करने के लिए स्वीकार करता है जो उसमंन विश्वास करते हैं और उसका अनुसरण करते हैं। जब आप प्रार्थना करके नए जीवन, प्रेम, और दया का अनुभव कर सकते हैं। जीसस ने दोषी नहीं ठहराया (हम पहले से ही दोषी हैं)। वह हमें बचाने, ढ़ूंढ़ने, छुड़ाने और हमें प्यार करने के लिए आए! हमें अपने रास्ते से भटकने के लिए पश्चाताप अवश्य करना चाहिए, जो पाप और ईश्वर के प्रति विद्रोह का रास्ता था।
आप यह प्रार्थना कर सकते हैं, आप इसे जोर से भी कह सकते हैं:
"हे ईश्वर, मुझे आपकी ज़रूरत है तथा मैं आपको जानना चाहता हूं। मैं इतना जानना चाहता हूं कि मैं आपको अपना जीवन किस तरह अर्पित करुं। मेरा विश्वास है कि जीसस की मृत्यु हमारे कारण हुई, वह कब्र से जीवित हो उठे और स्वर्ग में चले गए तथा अब वह मेरी आवाज सुन रहे हैं। जीसस मैं आपका अनुयायी बनना चाहता हूं, मुझे पश्चाताप् करना है और पाप से दूर जाना है, क्योंकि आपने मुझे एक नया दिल दिया है। मेरा मन पवित्र आत्मा से भर दो, सभी से प्रेम करने में मेरी मदद करो, मैं सभी को माफ करता हूं। प्रभु यीशु, मुझे अपना मार्ग दिखाओ, मैं सच्चे दिल से आपका अनुसरण करना चाहता हूं। स्वर्ग में मेरा घर बनाओ। मुझे जीसस से कोई शर्म नहीं-जीसस के नाम में, मैं प्रार्थना करता हूं।''
अब अपने शब्दों में जीसस से बात करें - अब वह सदा के लिए आपका अपना दोस्त है। यदि आपको बाइबल में जीसस के शब्द या अन्य मेरी अन्य लिखी हुई सहायक सामग्री चाहिए तो मुझसे हमारे पते पर संपर्क करें - यह निःशुल्क है! मेरे पास आपके इसमें शामिल होने के लिए कुछ भी नहीं है, आप ईश्वर से जुड़ गए हैं-यही पर्याप्त है- आप ईश्वर के परिवार में मेरे प्रिय भाई अथवा बहन हैं। आइए, हम सभी प्रेम, दया, शांति और परिवार में साथ-साथ जीवन बिताएं। एक दूसरे का ध्यान रखकर, लोगों के उत्थान में मदद करके, किसी को भी नीचे न रखकर, सभी के लिए सहायक बनकर तथा एक दोस्त के रूप में उपलब्ध होकर। ईश्वर आपको शांति दे!
यदि आपने यहां सलेक्ट करके यह प्रार्थना की है, तो कृपया हमें बताएं। हम आपके साथ आनन्द लेना चाहेंगे।
आर्थर और डेनिस
ल्यूक 18:1

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